Śākadvīpa–Pramāṇa–Varṇana
Measurements and Description of Śākadvīpa
षष्टिमाहु: शतान्यस्य बुधा: पौराणिकास्तथा । चन्द्रमास्तु सहस्राणि राजन्नेकादश स्मृत:,पौराणिक विद्वान् उसकी विपुलता (मोटाई) छः: हजार योजनकी बताते हैं। राजन! चन्द्रमाका व्यास ग्यारह हजार योजन है
ṣaṣṭim āhuḥ śatāny asya budhāḥ paurāṇikās tathā | candramās tu sahasrāṇi rājann ekādaśa smṛtaḥ ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ରାଜନ୍! ପୌରାଣିକ ବୁଦ୍ଧିମାନମାନେ ଏହାର ମୋଟାଇ ଷଷ୍ଟି ଶତ, ଅର୍ଥାତ୍ ଛଅ ହଜାର ଯୋଜନ ବୋଲି କହନ୍ତି। ଏବଂ ରାଜନ୍! ଚନ୍ଦ୍ରମାର ବ୍ୟାସ ଏକାଦଶ ସହସ୍ର ଯୋଜନ ବୋଲି ସ୍ମୃତ।
संजय उवाच