भीष्म-पर्व अध्याय १०० — त्रिगर्त-आक्रमण, भीष्म-केन्द्रित पुनर्संयोजन, तथा शक्त्यस्त्र-विनिमय
अनुयात्र यथा सर्व सज्जीभवति सर्वश: । दुःशासन तथा क्षिप्र॑ं सर्वमेवोपपादय
“ଦୁଃଶାସନ! ଯାତ୍ରା ପାଇଁ ଆବଶ୍ୟକ ସମସ୍ତ ପ୍ରସ୍ତୁତି ସବୁ ଦିଗରୁ ସମ୍ପନ୍ନ ହେବ ଭଳି, ଶୀଘ୍ର ସମସ୍ତ ବ୍ୟବସ୍ଥା କର।”
कर्ण उवाच