यज्ञवाटवैभववर्णनम् / Description of the Splendour of the Sacrificial Enclosure
दिष्ट्यासि पार्थ कुशली धन्यो राजा युधिष्ठिर: । वहाँ अर्जुनने लोगोंके मुँहसे हर्ष बढ़ानेवाली बातें इस प्रकार सुनीं--'पार्थ! यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि तुम सकुशल लौट आये। राजा युधिष्ठिर धन्य हैं ।।
‘ପାର୍ଥ! ତୁମେ କୁଶଳରେ ଫେରିଆସିଛ—ଏହା ମହାସୌଭାଗ୍ୟ; ରାଜା ଯୁଧିଷ୍ଠିର ଧନ୍ୟ।’
युधिष्ठिर उवाच