Ādi-parva Adhyāya 98 — Paraśurāma’s kṣatriya suppression; Dīrghatamas, Bali, Sudēṣṇā, and the birth of Aṅga
प्रतीप उवाच नाहं परस्त्रियं कामाद् गच्छेयं वरवर्णिनि । न चासवर्णा कल्याणि धर्म्यमेतद्धि मे व्रतम्,प्रतीपने कहा--सुन्दरी! मैं कामवश परायी स्त्रीके साथ समागम नहीं कर सकता। जो अपने वर्णकी न हो, उससे भी मैं सम्बन्ध नहीं रख सकता। कल्याणि! यह मेरा धर्मानुकूल व्रत है
ପ୍ରତୀପ କହିଲେ—“ସୁନ୍ଦରୀ! କାମବଶେ ମୁଁ ପରସ୍ତ୍ରୀ ସହ ସଙ୍ଗମ କରିପାରେ ନାହିଁ; ଏବଂ ଯେ ମୋର ବର୍ଣ୍ଣର ନୁହେଁ, ତାଙ୍କ ସହ ମଧ୍ୟ ସମ୍ପର୍କ ରଖେ ନାହିଁ। କଲ୍ୟାଣୀ! ଏହା ମୋର ଧର୍ମସମ୍ମତ ବ୍ରତ।”
प्रतीप उवाच