अध्याय ९५: चित्राङ्गदस्य गन्धर्वेण सह संग्रामः तथा विचित्रवीर्यस्य राज्याभिषेकः
Chitrāṅgada’s duel with the Gandharva and Vicitravīrya’s consecration
पुष्करिण्यामृचीकश्न भुमन्योरभवन् सुता: । तेषां ज्येष्ठ: सुहोत्रस्तु राज्यमाप महीक्षिताम्,भुमन्युके दिविरथ नामक पुत्र हुआ। उसके सिवा सुहोत्र, सुहोता, सुहवि, सुयजु तथा ऋचीक भी भुमन्युके ही पुत्र थे। ये सब पुष्करिणीके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। इन सब क्षत्रियोंमें सुहोत्र ही ज्येष्ठ थे। अत: उन्हींको राज्य मिला
vaiśampāyana uvāca | puṣkariṇyām ṛcīkaś ca bhūmanyor abhavan sutāḥ | teṣāṁ jyeṣṭhaḥ suhotras tu rājyam āpa mahīkṣitām |
ପୁଷ୍କରିଣୀଙ୍କ ଗର୍ଭରୁ ଭୂମନ୍ୟୁଙ୍କର ଋଚୀକ ସହିତ ପୁତ୍ରମାନେ ଜନ୍ମିଲେ। ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ସୁହୋତ୍ର ଜ୍ୟେଷ୍ଠ; ତେଣୁ ଭୂପତିମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ସେ ରାଜ୍ୟ ପାଇଲା।
वैशम्पायन उवाच