आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
अग्रजातेति तां कन्यां शूरो<नुग्रहकाड्क्षया । अददात् कुन्तिभोजाय स तां दुहितरं तदा,तदनन्तर सबसे पहले उनके यहाँ कन्या ही उत्पन्न हुई। शूरसेनने अनुग्रहकी इच्छासे राजा कुन्तिभोजको अपनी वह पुत्री पृथा प्रथम संतान होनेके कारण गोद दे दी
agrajāteti tāṁ kanyāṁ śūro'nugrahakāṅkṣayā | adadāt kuntibhojāya sa tāṁ duhitaraṁ tadā ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ— ସେ କନ୍ୟା ପ୍ରଥମଜାତ ଥିବାରୁ, ଅନୁଗ୍ରହ କରିବା ଇଚ୍ଛାରେ ଶୂରସେନ ସେହି ସମୟରେ ନିଜ କନ୍ୟାକୁ ରାଜା କୁନ୍ତିଭୋଜଙ୍କୁ ଦାନ କଲେ।
वैशम्पायन उवाच