Śakuntalā-Janma-Nāmakaraṇa (Birth and Naming of Śakuntalā) | शकुन्तला-जन्म-नामकरणम्
धरो ध्रुवश्च सोमश्न अहश्चैवानिलोडनल: । प्रत्यूषश्न प्रभासश्ष॒ वसवोडष्टौ प्रकीर्तिता:,लोक-व्यवहारका निर्वाह करनेके लिये वे सब-की-सब नक्षत्र-वाचक नामोंसे युक्त हैं। पितामह ब्रह्माजीके स्तनसे उत्पन्न होनेके कारण मुनिवर धर्मदेव उनके पुत्र माने गये हैं। प्रजापति दक्ष भी ब्रह्माजीके ही पुत्र हैं। दक्षकी कन्याओंके गर्भसे धर्मके आठ पुत्र उत्पन्न हुए, जिन्हें वसुगण कहते हैं। अब मैं वसुओंका विस्तारपूर्वक परिचय देता हूँ। धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभास--ये आठ वसु कहे गये हैं
dharaḥ dhruvaś ca somaś ca ahaś caivānilo'nalaḥ | pratyūṣaś ca prabhāsaś ca vasavo'ṣṭau prakīrtitāḥ ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ଧର, ଧ୍ରୁବ, ସୋମ, ଅହ, ଅନିଲ, ଅନଲ, ପ୍ରତ୍ୟୂଷ ଓ ପ୍ରଭାସ—ଏହି ଆଠଜଣ ‘ବସୁ’ ଭାବେ ପ୍ରକୀର୍ତ୍ତିତ।
वैशम्पायन उवाच