Tapovana-praveśaḥ — The King’s Entry into the Sacred Grove and Vision of the Āśrama
न हामी भूतसत्त्वौधा: पन्नगा: सनगां महीम् | तदा धारयितुं शेकुः संक्रान्तां दानवैर्बलातू,दानवोंने बलपूर्वक जिसपर अधिकार कर लिया था, पर्वतों और वृक्षोंसहित उस पृथ्वीको उस समय कच्छप और दिग्गज आदिकी संगठित शक्तियाँ तथा शेषनाग भी धारण करनेमें समर्थ न हो सके। महीपाल! तब असुरोंके भारसे आतुर तथा भयसे पीड़ित हुई पृथ्वी सम्पूर्ण भूतोंक पितामह भगवान् ब्रह्माजीकी शरणमें उपस्थित हुई। ब्रह्मलोकमें जाकर पृथ्वीने उन लोकस्रष्टा अविनाशी देव भगवान् ब्रह्माजीका दर्शन किया, जिन्हें महाभाग देवता, द्विज और महर्षि घेरे हुए थे
na hīmī bhūtasattvauḍhāḥ pannagāḥ sanagā mahīm | tadā dhārayituṃ śekuḥ saṅkrāntāṃ dānavair balāt ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ଦାନବମାନେ ବଳପୂର୍ବକ ଯେ ପୃଥିବୀକୁ ଅଧିକାର କରିଥିଲେ, ସେହି ପର୍ବତ-ବନସହିତ ପୃଥିବୀକୁ ସେତେବେଳେ ଭୂତସତ୍ତ୍ୱମାନଙ୍କ ସମୂହ ଓ ପନ୍ନଗଗଣ ମଧ୍ୟ ଧାରଣ କରିପାରିଲେ ନାହିଁ। ଅସୁରମାନଙ୍କ ଭାରରେ କ୍ଳାନ୍ତ ଓ ଭୟରେ ପୀଡ଼ିତ ପୃଥିବୀ ସର୍ବଭୂତପିତାମହ ବ୍ରହ୍ମାଙ୍କ ଶରଣକୁ ଗଲା।
वैशम्पायन उवाच