Duḥṣantasya Vana-praveśaḥ
King Duḥṣanta’s Entry into the Forest Hunt
इदं मिथ्या परिस्कन्नं रेतो मे न भवेदिति । ऋतुश्न तस्या: पत्न्या मे न मोघः स्यादिति प्रभु:,उन्होंने विचार किया, “मेरा यह स्खलित वीर्य व्यर्थ न हो, साथ ही मेरी पत्नी गिरिकाका ऋतुकाल भी व्यर्थ न जाय” इस प्रकार बारम्बार विचारकर राजाओंमें श्रेष्ठ वसुने उस वीर्यको अमोघ बनानेका ही निश्चय किया
ପ୍ରଭୁ ଭାବିଲେ—“ମୋର ଏହି ସ୍ଖଳିତ ବୀର୍ୟ ବ୍ୟର୍ଥ ନ ହେଉ; ମୋର ପତ୍ନୀର ଋତୁକାଳ ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ଫଳ ନ ଯାଉ।”
वैशम्पायन उवाच