Duḥṣantasya Vana-praveśaḥ
King Duḥṣanta’s Entry into the Forest Hunt
चकार मृगयां कामी गिरिकामेव संस्मरन् | अतीवरूपसम्पन्नां साक्षाच्छियमिवापराम्,और जो कन्या थी उसे राजाने अपनी पत्नी बना लिया। उसका नाम था गिरिका। बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ जनममेजय! एक दिन ऋतुकालको प्राप्त हो स्नानके पश्चात् शुद्ध हुई वसुपत्नी गिरिकाने पुत्र उत्पन्न होने योग्य समयमें राजासे समागमकी इच्छा प्रकट की। उसी दिन पितरोंने राजाओंमें श्रेष्ठ वसुपर प्रसन्न हो उन्हें आज्ञा दी--'तुम हिंसक पशुओंका वध करो।' तब राजा पितरोंकी आज्ञाका उल्लंघन न करके कामनावश साक्षात् दूसरी लक्ष्मीके समान अत्यन्त रूप और सौन्दर्यके वैभवसे सम्पन्न गिरिकाका ही चिन्तन करते हुए हिंसक पशुओंको मारनेके लिये वनमें गये
vaishampāyana uvāca | cakāra mṛgayāṃ kāmī girikām eva saṃsmaran | atīvarūpasampannāṃ sākṣāc chriyam ivāparām |
କାମବଶ ହୋଇ ରାଜା ମୃଗୟା କଲେ, ଏବଂ ଗିରିକାକୁ ହିଁ ନିରନ୍ତର ସ୍ମରଣ କରୁଥିଲେ—ଅତ୍ୟନ୍ତ ରୂପସମ୍ପନ୍ନା, ଯେନ ସାକ୍ଷାତ୍ ଅପରା ଶ୍ରୀ।
वैशम्पायन उवाच