Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
उत्तड़क देशे काले<भ्यागत: स्वागतं ते वत्स त्वमनागसि मया न शप्तः श्रेयस्तवोपस्थितं सिद्धिमाप्रुहीति,“उत्तंक! तू ठीक समयपर उचित स्थानमें आ पहुँचा। वत्स! तेरा स्वागत है। अच्छा हुआ जो बिना अपराधके ही तुझे शाप नहीं दिया। तेरा कल्याण उपस्थित है, तुझे सिद्धि प्राप्त हो
“ଉତ୍ତଙ୍କ! ଦେଶ-କାଳ ଅନୁସାରେ ତୁମେ ଠିକ୍ ସମୟରେ ଆସିପହଞ୍ଚିଛ। ବତ୍ସ, ତୁମକୁ ସ୍ୱାଗତ। ତୁମେ ନିର୍ଦୋଷ; ତେଣୁ ମୁଁ ତୁମକୁ ଶାପ ଦେଇନି। ତୁମର ଶ୍ରେୟ ନିକଟେ—ତୁମେ ସିଦ୍ଧି ପାଅ।”
राम उवाच