Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
यो वाजिन गर्भमपां पुराणं वैश्वानरं वाहनमभ्युपैति । नमोअस्तु तस्मै जगदी श्चराय लोकत्रयेशाय पुरन्दराय,जो महात्मा वज्र धारण करके तीनों लोकोंकी रक्षा करते हैं, जिन्होंने वृत्रासुरका वध तथा नमुचि दानवका संहार किया है, जो काले रंगके दो वस्त्र पहनते और लोकमें सत्य एवं असत्यका विवेचन करते हैं; जलसे प्रकट हुए प्राचीन वैश्वानररूप अश्वको वाहन बनाकर उसपर चढ़ते हैं तथा जो तीनों लोकोंके शासक हैं, उन जगदीश्वर पुरन्दरको मेरा नमस्कार है
yo vājina garbham apāṃ purāṇaṃ vaiśvānaraṃ vāhanam abhyupaiti | namo 'stu tasmai jagadīśvarāya lokatrayeśāya purandarāya ||
ଯିଏ ଜଳର ‘ଗର୍ଭ’ ବୋଲି ପ୍ରସିଦ୍ଧ ପ୍ରାଚୀନ ବୈଶ୍ୱାନରରୂପ ଅଶ୍ୱକୁ ନିଜ ବାହନ କରି ତାହା ପାଖକୁ ଯାଇ ତାହାରେ ଆରୋହଣ କରନ୍ତି—ସେଇ ଜଗଦୀଶ୍ୱର, ଲୋକତ୍ରୟେଶ ପୁରନ୍ଦରଙ୍କୁ ନମସ୍କାର।
राम उवाच