लोकपालो न तां वाचमुकक्त्वा मिथ्या करिष्यति । समक्ष बन्धुकृत्ये न तेन ते स्वस्थ मानसम्,“वे लोकपाल हैं। जब बात दे चुके हैं, तब उसे झूठी नहीं करेंगे। अतः स्वस्थ पुरुष! तुम्हारा मन अपने बच्चोंकी रक्षारूप बन्धुजनोचित कर्तव्यके पालनेके लिये उत्सुक नहीं है
lokapālo na tāṁ vācam uktvā mithyā kariṣyati | samakṣaṁ bandhukṛtye na tena te svastha mānasam ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ସେ ଲୋକପାଳ; ଏକଥର ଦିଆଯାଇଥିବା ବଚନକୁ ସେ ମିଥ୍ୟା କରିବେ ନାହିଁ। ତେଣୁ, ହେ ସ୍ଥିରଚିତ୍ତ, ତୁମ ମନ ନିଶ୍ଚିନ୍ତ ରୁହ; ବନ୍ଧୁଧର୍ମ—ବିଶେଷକରି ସନ୍ତାନରକ୍ଷା—ସେ ସର୍ବସମ୍ମୁଖରେ ନିଷ୍କପଟ ଭାବେ ପାଳନ କରିବେ।
वैशम्पायन उवाच