तरुणी दर्शनीयासि समर्था भर्तुरिषणे | अनुगच्छ पति मात: पुत्रानाप्स्यसि शोभनान्,माँ! अभी तुम्हारी तरुण अवस्था है, तुम दर्शनीय सुन्दरी हो और पतिके अन्वेषणमें समर्थ भी हो। अत: पतिका ही अनुसरण करो। तुम्हें फिर सुन्दर पुत्र मिल जायँगे
taruṇī darśanīyāsi samarthā bhartur iṣaṇe | anugaccha pati mātaḥ putrān āpsyasi śobhanān ||
ମା! ତୁମେ ଏଯାବତ୍ ତରୁଣୀ, ଦର୍ଶନୀୟା, ଏବଂ ପତିଙ୍କୁ ଅନ୍ୱେଷଣ କରିବାରେ ସମର୍ଥା। ତେଣୁ ପତିଙ୍କ ପଥକୁ ଅନୁସରଣ କର; ତୁମେ ପୁନର୍ବାର ଶୋଭନ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ ପୁତ୍ରମାନେ ପାଇବ।
वैशम्पायन उवाच