खाण्डवदाहोत्तर-वरप्रदानम्
Boons after the Khāṇḍava Burning
ते शराचितसर्वाड्रा निनदन्तो महारवान् | ऊर्ध्वमुत्पत्य वेगेन निपेतु: खाण्डवे पुन:,पहले तो पक्षी बड़े वेगसे ऊपरको उड़ते, परंतु बाणोंसे सारा अंग छिद जानेपर जोर- जोरसे आर्तनाद करते हुए पुनः खाण्डववनमें ही गिर पड़ते थे
te śarācita-sarvāṅgā ninadanto mahāravān | ūrdhvam utpatya vegena nipetuḥ khāṇḍave punaḥ ||
ଶରରେ ସର୍ବାଙ୍ଗ ଛିଦ୍ରିତ ହୋଇ ସେ ପକ୍ଷୀମାନେ ଭୟଙ୍କର ମହାରବ କରୁଥିଲେ। ବେଗରେ ଉପରକୁ ଉଡ଼ିଲେ ମଧ୍ୟ ପୁଣି ଖାଣ୍ଡବବନରେ ହିଁ ପତିତ ହେଉଥିଲେ।
वैशम्पायन उवाच