Śārṅgakānāṃ Avināśaḥ (Why the Śārṅga Birds Were Spared) | शार्ङ्गकानामविनाशः
प्रदानमपि कन्याया: पशुवत् को<नुमन्यते । विक्रयं चाप्यपत्यस्य कः कुर्यात् पुरुषो भुवि,“भला, कौन ऐसा वीर पुरुष होगा, जो पशुकी तरह पराक्रमशून्य होकर कन्यादानकी प्रतीक्षामें बैठा रहेगा एवं इस पृथ्वीपर कौन ऐसा अधम पुरुष होगा, जो धन लेकर अपनी संतानको बेचेगा
କନ୍ୟାଦାନକୁ ମଧ୍ୟ—ପଶୁ ପରି—କିଏ ମାନିବ? ଏବଂ ଏହି ପୃଥିବୀରେ ଧନ ନେଇ ନିଜ ସନ୍ତାନକୁ କିଏ ବିକ୍ରୟ କରିବ?
वैशम्पायन उवाच