Sundopasundayoḥ Tapas–Varadāna–Prasaṅgaḥ
Sunda and Upasunda: Austerities and the Boon
आर्यव्रतश्न॒ पाज्चाल्यो न स राजा धनप्रिय: । न संत्यक्ष्यति कौन्तेयान् राज्यदानैरपि ध्रुवम्,पांचालराज ट्रुपद श्रेष्ठ व्ररका पालन करनेवाले हैं। वे धनके लोभी नहीं हैं। अतः तुम अपना सारा राज्य दे दो, तो भी यह निश्चय है कि वे कुन्ती-पुत्रोंका परित्याग नहीं करेंगे
ପାଞ୍ଚାଳରାଜ ଦ୍ରୁପଦ ଆର୍ୟବ୍ରତ ପାଳନକାରୀ; ସେ ଧନଲୋଭୀ ନୁହେଁ। ତେଣୁ ତୁମେ ରାଜ୍ୟଦାନ କରିଦେଲେ ମଧ୍ୟ ନିଶ୍ଚୟ—ସେ କୌନ୍ତେୟମାନଙ୍କୁ ପରିତ୍ୟାଗ କରିବେ ନାହିଁ।
कर्ण उवाच