पराशरस्य राक्षससत्रनिवृत्तिः | Paraśara’s Rakṣasa-Satra and Its Cessation
तपत्युवाच नाहमीशा55त्मनो राजन् कन्या पितृमती हाहम् | मयि चेदस्ति ते प्रीतिर्याचस्व पितरं मम,तपतीने कहा--राजन! मैं ऐसी कन्या हूँ, जिसके पिता विद्यमान हैं; अत: अपने इस शरीरपर मेरा कोई अधिकार नहीं है। यदि आपका मुझपर प्रेम है तो मेरे पिताजीसे मुझे माँग लीजिये
tapaty uvāca: nāham īśātmanaḥ rājan, kanyā pitṛmatī hāham | mayi ced asti te prītir, yācasva pitaraṃ mama ||
ତପତୀ କହିଲା—ହେ ରାଜନ୍! ମୁଁ ନିଜ ଉପରେ ସ୍ୱାଧୀନ ନୁହେଁ; ମୁଁ ପିତା ଜୀବିତ ଥିବା କନ୍ୟା। ଯଦି ମୋ ପ୍ରତି ତୁମର ପ୍ରୀତି ଅଛି, ତେବେ ମୋ ପିତାଙ୍କୁ ଯାଚନା କରି ମୋତେ ମାଗ।
गन्धर्व उवाच