बक-राक्षसस्य आह्वानम् तथा वृक्षयुद्धम्
Summons of Baka and the Tree-Weapon Engagement
असकृच्चापि संतीर्य दूरपारं भुजप्लवै: | पथि प्रच्छन्नमासेदुर्धार्तराष्ट्रभयात् तदा,मार्गमें आये हुए जल-प्रवाहको, जिसका पाट दूरतक फैला होता था, दोनों भुजाओंके बेड़ेद्वारा ही बारंबार पार करके वे सब पाण्डव दुर्योधनके भयसे किसी गुप्त स्थानमें जाकर रहते थे
ସେମାନେ ନିଜ ଭୁଜକୁ ତରଣୀ ସଦୃଶ କରି ଦୂରପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରସାରିତ ଜଳପ୍ରବାହକୁ ପୁନଃପୁନଃ ଅତିକ୍ରମ କରୁଥିଲେ; ତାହାବେଳେ ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ରପୁତ୍ରମାନଙ୍କ ଭୟରୁ ପଥମଧ୍ୟରେ ଗୁପ୍ତ ସ୍ଥାନକୁ ଆଶ୍ରୟ କରୁଥିଲେ।
वैशम्पायन उवाच