बक-राक्षसस्य आह्वानम् तथा वृक्षयुद्धम्
Summons of Baka and the Tree-Weapon Engagement
सकामो भव दुर्बुद्धे धार्तराष्ट्राल्पदर्शन । नूनं देवा: प्रसन्नास्ते नानुज्ञां मे युधिष्ठिर:,'ओ दुर्बुद्धि अल्पदर्शी धृतराष्ट्रकुमार दुर्योधन! आज तेरी कामना पूरी हुई। निश्चय ही देवता तुझपर प्रसन्न हैं। तभी तो राजा युधिष्ठिर मुझे तेरा वध करनेकी आज्ञा नहीं दे रहे हैं। दुर्मती! यही कारण है कि तू अबतक जी रहा है। रे पापाचारी! मैं आज ही जाकर कुपित हो मन्त्रियों, कर्ण, छोटे भाई और शकुनिसहित तुझे यमलोक भेज सकता हूँ। किंतु क्या करूँ, पाण्डवश्रेष्ठ धर्मात्मा युधिष्ठिर तुझपर कोप नहीं कर रहे हैं'। यों कहकर महाबाहु भीम मन-ही-मन क्रोधसे जलते और हाथ-से-हाथ मलते हुए दीनभावसे लंबी साँसें खींचने लगे। बुझी हुई लपटोंवाली अग्निकी भाँति दीनहृदय होकर वे पुनः धरतीपर सोये हुए भाइयोंकी ओर देखने लगे। उनके वे सभी भाई साधारण लोगोंकी भाँति भूमिधर ही निश्चिन्ततापूर्वक सो रहे थे
sākāmo bhava durbuddhe dhārtarāṣṭrālpadarśana | nūnaṃ devāḥ prasannās te nānujñāṃ me yudhiṣṭhiraḥ ||
ହେ ଦୁର୍ବୁଦ୍ଧି, ଅଳ୍ପଦର୍ଶୀ ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ରପୁତ୍ର! ତୋର କାମନା ସଫଳ ହେଉ। ନିଶ୍ଚୟ ଦେବମାନେ ତୋପରେ ପ୍ରସନ୍ନ; ସେହିପାଇଁ ଯୁଧିଷ୍ଠିର ମୋତେ ତୋର ବଧର ଅନୁମତି ଦେଉନାହାନ୍ତି।
वैशम्पायन उवाच