Ādi Parva, Adhyāya 146 — Brāhmaṇī’s counsel on grief, duty, and protection of children
सत्कृताश्चैव पौरैस्ते पौरान् सत्कृत्य चानघ । अलंकृतं जनाकीर्ण विविशुर्वारणावतम्,निष्पाप जनमेजय! पुरवासियोंने पाण्डवोंका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। फिर पाण्डवोंने भी नागरिकोंको आदरपूर्वक अपनाकर जनसमुदायसे भरे हुए सजे-सजाये वारणावत नगरमें प्रवेश किया
ନିଷ୍ପାପ ଜନମେଜୟ! ପୌରମାନେ ସେମାନଙ୍କୁ ଯଥୋଚିତ ସତ୍କାର କଲେ; ପାଣ୍ଡବମାନେ ମଧ୍ୟ ପୌରମାନଙ୍କୁ ସମ୍ମାନ ଦେଇ, ଜନସମୂହରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ସୁସଜ୍ଜିତ ବାରଣାବତ ନଗରରେ ପ୍ରବେଶ କଲେ।
वैशम्पायन उवाच