Ruru–Ḍuṇḍubha Saṃvāda: Śāpa, Mokṣa, and Ahiṃsā-Upadeśa
Chapter 11
वेदवेदाड़विन्नाम सर्वभूताभयप्रद: । अहिंसा सत्यवचन क्षमा चेति विनिश्चितम्,“वह वेद-वेदांगोंका विद्वान् और समस्त प्राणियोंको अभय देनेवाला होता है। अहिंसा, सत्यभाषण, क्षमा और वेदोंका स्वाध्याय निश्चय ही ये ब्राह्मणके उत्तम धर्म हैं। क्षत्रियका जो धर्म है वह तुम्हारे लिये अभीष्ट नहीं है
veda-vedāṅga-vid nāma sarva-bhūtābhaya-pradaḥ | ahiṃsā satya-vacanaṃ kṣamā ceti viniścitam ||
ଯେ ବେଦ ଓ ବେଦାଙ୍ଗରେ ପାରଙ୍ଗତ, ସେଇ ସମସ୍ତ ପ୍ରାଣୀଙ୍କୁ ଅଭୟ ଦେଇଥାଏ। ଅହିଂସା, ସତ୍ୟବଚନ ଓ କ୍ଷମା—ଏହିମାନେ ନିଶ୍ଚୟ ଭାବେ (ତାହାର) ଧର୍ମ ଭାବେ ନିର୍ଣ୍ଣୀତ।
डुण्ड्रुभ उवाच