Ruru–Ḍuṇḍubha Saṃvāda: Śāpa, Mokṣa, and Ahiṃsā-Upadeśa
Chapter 11
अपन बछ। ] अतिफऑशाए:< एकादशोब< ध्याय: डुण्डुभकी आत्मकथा तथा उसके द्वारा रुकुको अहिंसाका उपदेश डुण्ड्रुभ उवाच सखा बभूव मे पूर्व खगमो नाम वै द्विज: । भृशं संशितवाक् तात तपोबलसमन्वित:,डुण्डुभने कहा--तात! पूर्वकालमें खगम नामसे प्रसिद्ध एक ब्राह्मण मेरा मित्र था। वह महान् तपोबलसे सम्पन्न होकर भी बहुत कठोर वचन बोला करता था। एक दिन वह अन्निहोत्रमें लगा था। मैंने खिलवाड़में तिनकोंका एक सर्प बनाकर उसे डरा दिया। वह भयके मारे मूर्च्छित हो गया
Duṇḍrubha uvāca | sakhā babhūva me pūrvaṃ khagamo nāma vai dvijaḥ | bhṛśaṃ saṃśitavāk tāta tapobalasamanvitaḥ ||
ଡୁଣ୍ଡ୍ରୁଭ କହିଲା—ତାତ! ପୂର୍ବକାଳରେ ଖଗମ ନାମକ ଜଣେ ବ୍ରାହ୍ମଣ ମୋର ସଖା ଥିଲେ। ସେ ତପୋବଳସମ୍ପନ୍ନ ଥିଲେ, କିନ୍ତୁ ବାକ୍ୟରେ ଅତ୍ୟନ୍ତ କଠୋର ଥିଲେ।
डुण्ड्रुभ उवाच