Sudeva Identifies Damayantī in Cedi (सुदेवेन दमयन्ती-परिचयः)
शकुनानां फलं वाथ विपरीतमिदं ध्रुवम् । ग्रहा न विपरीतास्तु किमन्यदिदमागतम्,वहाँ उसने वह महासंहार अपनी आँखों देखा, जो सब लोगोंके लिये भयंकर था। उसने ऐसी दुर्घटना पहले कभी नहीं देखी थी। यह सब देखकर वह कमलनयनी बाला भयसे व्याकुल हो उठी। उसको कहींसे कोई सान्त्वना नहीं मिल रही थी। वह इस प्रकार स्तब्ध हो रही थी, मानो धरतीसे सट गयी हो। तदनन्तर वह किसी प्रकार उठकर खड़ी हुई। दलके जो लोग उस संकटसे मुक्त हो आघातसे बचे हुए थे, वे सब एकत्र हो कहने लगे कि “यह हमारे किस कर्मका फल है? निश्चय ही हमने महायशस्वी मणिभद्रका पूजन नहीं किया है। इसी प्रकार हमने श्रीमान् यक्षराज कुबेरकी भी पूजा नहीं की है अथवा विघ्नकर्ता विनायकोंकी भी पहले पूजा नहीं कर ली थी। अथवा हमने पहले जो-जो शकुन देखे थे, उसका यह विपरीत फल है। यदि हमारे ग्रह विपरीत न होते तो और किस हेतुसे यह संकट हमारे ऊपर कैसे आ सकता था?”
Bṛhadaśva uvāca: śakunānāṃ phalaṃ vātha viparītam idaṃ dhruvam | grahā na viparītās tu kim anyad idam āgatam ||
ဗြဟဒသွဝက ပြောသည်– «ဤအရာသည် ကျွန်ုပ်တို့မြင်ခဲ့သော နိမိတ်များ၏ ဆန့်ကျင်သော အကျိုးဖြစ်သည်မှာ သေချာသည်။ ဂြိုဟ်များ မဆိုးရွားလျှင်၊ ဤဘေးကပ်ကြီးကို အခြားမည်သည့်အရာက ယူဆောင်လာနိုင်မည်နည်း?»
बृहदश्चव उवाच