कुन्ती द्वारा ब्राह्मण-सेवा
Kuntī’s Regulated Hospitality to a Brāhmaṇa Guest
सुदीर्घमिव नि:श्वस्य समुत्पत्य वरासनात् । उवाच कुम्भकर्णस्य कर्मकालोडयमागत:,उनके मुखसे श्रेष्ठ वानर वीरोंद्वारा युद्धमें सेनासहित प्रहस्त तथा महाधनुर्धर धूम्राक्षके मारे जानेका वृत्तान्त सुनकर रावण बड़ी देरतक शोकभरे उच्छवास लेता रहा। फिर वह अपने श्रेष्ठ सिंहासनसे उछलकर खड़ा हो गया और बोला--“अब यह कुम्भकर्णके पराक्रम दिखलानेका समय आ गया है”
sudīrgham iva niḥśvasya samutpatya varāsanāt | uvāca kumbhakarṇasya karmakālo ’yam āgataḥ ||
မာရကဏ္ဍေယက ပြောသည်– သူသည် ဝမ်းနည်းသက်ပြင်းရှည်တစ်ချက် ချပြီးနောက် တင့်တယ်သော အာသနမှ ခုန်ထကာ “ယခုက ကုမ္ဘကဏ္ဏ လုပ်ဆောင်ရမည့် အချိန်ရောက်ပြီ” ဟု ဆို၏။
मार्कण्डेय उवाच