Kubera’s Arrival and the Disclosure of Agastya’s Curse
Vaiśaṃpāyana–Janamejaya Narrative
'राक्षस धर्मके मूल हैं। वे उत्तम धर्मका ज्ञान रखते हैं। इन सब बातोंका विचार करके तुझे हमलोगोंके समीप ही रहना चाहिये। राक्षस! देवता, ऋषि, सिद्ध, पितर, गन्धर्व, नाग, राक्षस, पशु, तिर्यग्योनिके सभी प्राणी और कीड़े-मकोड़े, चींटी आदि भी मनुष्योंके आश्रित हो जीवन-निर्वाह करते हैं। इस दृष्टिसे तू भी मनुष्योंसे ही जीविका चलाता है ॥| १४-- १६ || समृद्धया हास्य लोकस्य लोको युष्माकमृध्यति । इमं च लोक॑ शोचन्तमनुशोचन्ति देवता:,“इस मनुष्यलोककी समृद्धिसे ही तुम सब लोगोंका लोक समृद्धिशाली होता है। यदि इस लोककी दशा शोचनीय हो तो देवता भी शोकमें पड़ जाते हैं
samṛddhayā hāsya lokasya loko yuṣmākam ṛdhyati | imaṃ ca lokaṃ śocantam anuśocanti devatāḥ ||
ဝိုင်ရှမ္ပာယနက ဆိုသည်– «လူ့လောကဤလောက၏ စည်ပင်ချမ်းသာမှုကြောင့်ပင် သင်တို့သတ္တဝါတို့၏ လောကများလည်း စည်ပင်တိုးတက်လာသည်။ ဤလောကသည် သနားဖွယ်အခြေအနေသို့ ကျရောက်၍ ဝမ်းနည်းကြေကွဲရသောအခါ၊ နတ်တို့ပင် ထိုဝမ်းနည်းမှုနှင့်အတူ ဝမ်းနည်းကြေကွဲကြသည်»။
वैशम्पायन उवाच