उद्योगपर्व — अध्याय १५१: कृष्णस्य कौरव-अवज्ञा-निर्णयः तथा पाण्डव-योगाज्ञा
Krishna on the Kauravas’ Rejection of Counsel; Pandava Readiness Ordered
खानयामास परिखां केशवस्तत्र भारत । गुप्त्यर्थमपि चादिश्य बल तत्र न्यवेशयत्,भरतनन्दन जनमेजय! कुरुक्षेत्रमें हिरण्वती नामक एक पवित्र नदी है, जो स्वच्छ एवं विशुद्ध जलसे भरी है। उसके तटपर अनेक सुन्दर घाट हैं। उस नदीमें कंकड़, पत्थर और कीचड़का नाम नहीं है। उसके समीप पहुँचकर भगवान् श्रीकृष्णने खाईं खुदवायी और उसकी रक्षाके लिये पहरेदारोंको नियुक्त करके वहीं सेनाको ठहराया। महात्मा पाण्डवोंके लिये शिविरका निर्माण जिस विधिसे किया गया था, उसी प्रकारके भगवान् केशवने अन्य राजाओंके लिये शिविर बनवाये
vaiśampāyana uvāca |
khānayāmāsa parikhāṃ keśavas tatra bhārata |
gupthyartham api cādiśya balaṃ tatra nyaveśayat ||
ဝိုင်ရှမ္ပာယနက ပြောသည်– «အို ဘာရတ၊ ထိုနေရာ၌ ကေရှဝသည် ကာကွယ်ရေးအတွက် ချိုင့်တူးစေ하였다။ ထို့ပြင် လုံခြုံရေးအတွက်ပင် အမိန့်ထုတ်၍ စစ်တပ်ကို ထိုနေရာတည်းမှာပင် တပ်ချထား하였다»။
वैशम्पायन उवाच