Adhyāya 32: Rājasūya-Dīkṣā and Appointment of Court Offices (राजसूयदीक्षा तथा अधिकारविनियोगः)
शैरीषकं महोत्थं च वशे चक्रे महाद्युति: । आक्रोशं चैव राजर्षि तेन युद्धमभून्महत्,वहाँ उनका मत्तमयूर नामवाले शूरवीर क्षत्रियोंके साथ घोर संग्राम हुआ। उसपर अधिकार करनेके पश्चात् महान् तेजस्वी नकुलने समूची मरुभूमि (मारवाड़), प्रचुर धन- धान्यपूर्ण शैरीषक और महोत्थ नामक देशोंपर अधिकार प्राप्त कर लिया। महोत्थ देशके अधिपति राजर्षि आक्रोशको भी जीत लिया। आक्रोशके साथ उनका बड़ा भारी युद्ध हुआ था
vaiśampāyana uvāca | śairīṣakaṁ mahotthaṁ ca vaśe cakre mahādyutiḥ | ākrośaṁ caiva rājarṣi tena yuddham abhūn mahat |
ဝိုင်သမ္ပာယန မိန့်ကြားသည်– တောက်ပသည့် (နကူလ) သည် ရှိုင်ရီရှက နှင့် မဟောတ္ထ တို့ကို မိမိအာဏာအောက်သို့ ချုပ်ကိုင်စေ၏။ ထို့ပြင် ရာဇဣသီ အာကရိုးရှ ကိုလည်း အနိုင်ယူခဲ့ပြီး သူနှင့် ကြီးမားသော စစ်ပွဲတစ်ရပ် ဖြစ်ပွားခဲ့၏။
वैशम्पायन उवाच