सहदेव-दक्षिण-दिग्विजयः — Sahadeva’s Southern Conquest and the Māhiṣmatī–Agni Encounter
अपना छा | अ्--#र+ अष्टाविशोश् ध्याय: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना वैशम्पायन उवाच स श्वेतपर्वतं वीर: समतिक्रम्य वीर्यवान् । देशं किम्पुरुषावासं द्रुमपुत्रेण रक्षितम्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर पराक्रमी वीर पाण्डवश्रेष्ठ अर्जुन धवलगिरिको लाँघकर द्रुमपुत्रके द्वारा सुरक्षित किम्पुरुषदेशमें गये, जहाँ किन्नरोंका निवास था। वहाँ क्षत्रियोंका विनाश करनेवाले भारी संग्रामके द्वारा उन्होंने उस देशको जीत लिया और कर देते रहनेकी शर्तपर उस राजाको पुनः उसी राज्यपर प्रतिष्ठित कर दिया
vaiśampāyana uvāca | sa śvetaparvataṃ vīraḥ samatikramya vīryavān | deśaṃ kimpuruṣāvāsaṃ drumaputreṇa rakṣitam ||
ဝိုင်ရှမ္ပာယနက ပြော၏— ထို့နောက် သတ္တိပြည့်ဝသော သူရဲကောင်း အာర్జုနသည် အဖြူရောင်တောင် (Śveta-parvata) ကို ကျော်လွန်၍ ဒြုမပုတြက ကာကွယ်ထားသော ကိမ္ပုရုෂတို့ နေထိုင်ရာ ကိမ္ပုရုෂဒေသသို့ ဝင်ရောက်တော်မူ၏။
वैशम्पायन उवाच