Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
जरासंध॑ गतस्त्वेव पुरा यो न मया हतः । पुरुषोत्तमविज्ञातो योडसौ चेदिषु दुर्मति:,जिसे मैंने पहले मारा नहीं, उपेक्षावश छोड़ रखा है, जिसकी बुद्धि बड़ी खोटी है, जो चेदिदेशमें पुरुषोत्तम समझा जाता है, इस जगत्में जो अपने-आपको पुरुषोतम ही कहकर बताया करता है और मोहवश सदा मेरे शंख-चक्र आदि चिह्लोंको धारण करता है; वंग, पुण्ड्र तथा किरातदेशका जो राजा है तथा लोकमें वासुदेवके नामसे जिसकी प्रसिद्धि हो रही है, वह बलवान राजा पौण्ड्रक भी जरासंधसे ही मिला हुआ है
jarāsandhaṁ gatastv eva purā yo na mayā hataḥ | puruṣottama-vijñāto yo ’sau cediṣu durmatiḥ ||
သီရိကృష్ణက မိန့်တော်မူသည်– «စိတ်ဉာဏ်ဆိုးသော ထိုသူသည် စေဒီပြည်တွင် ‘ပုရုရှောတ္တမ’ ဟု ခေါ်ကြ၏။ အရင်က သူသည် ဇရာသန္ဓထံ သွားပေါင်းခဲ့သော်လည်း ငါသည် အရေးမထားသဖြင့် မသတ်ခဲ့။ ယခုလည်း ဇရာသန္ဓနှင့် ပေါင်းဖက်နေပြန်၏»။
श्रीकृष्ण उवाच