अध्याय ६० — कर्णस्य पाञ्चाल-सोमक-निग्रहः
Karna’s Suppression of the Panchala–Somaka Forces
/ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ९६ श्लोक हैं) अपन बक। है २ 2 एकषष्टितमो< ध्याय: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्म और दुःशासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, जग वाद उलककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कषाधायवारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेन-द्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन धृतराष्ट्र रवाच निवृत्ते भीमसेने च पाण्डवे च युधिष्ठिरे । वध्यमाने बले चापि मामके पाण्डुसृज्जयै:,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! जब भीमसेन और पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर लौट आये, पाण्डव और सूंजय मेरी सेनाका वध करने लगे और मेरा सैन्यसमुदाय आनन्दशून्य होकर बारंबार भागने लगा, उस समय कौरवोंने क्या किया? यह मुझे बताओ
dhṛtarāṣṭra uvāca |
nivṛtte bhīmasene ca pāṇḍave ca yudhiṣṭhire |
vadhyamāne bale cāpi māmake pāṇḍusṛñjayaiḥ |
kiṃ cakruḥ kuravaḥ sañjaya tan me brūhi
ဓೃತရာෂ္ဌရက မေးသည်။ «သဉ္ဇယ၊ ဘီမစೇန ပြန်လှည့်သွားပြီး ပाण्डု၏သား ယုဓိဋ္ဌိရလည်း ပြန်လှည့်လာသောအခါ၊ ပाण्डဝတို့နှင့် စೃဉ္ဇယတို့က ငါ့တပ်ကို ဖြတ်သတ်နေစဉ်၊ ကုရုတို့သည် ထိုအချိန်၌ ဘာလုပ်ခဲ့သနည်း။ ငါ့အား ပြောပြပါ»။
संजय उवाच