Pāṇḍu’s Marriages, Conquests, and Triumphal Return (पाण्डोर्विवाह-विजय-प्रत्यागमनम्)
सान्त्वपूर्व मुनिश्रेष्ठ: कामार्तो मधुरं वच: । उक्त जन्म कुलं महामस्मि दाशसुतेत्यहम्,“एक दिन मैं उसी नावपर गयी हुई थी। उन दिनों मेरे यौवनका प्रारम्भ था। उसी समय थधर्मज्ञोंमें श्रेष्ठ बुद्धिमान् महर्षि पराशर यमुना नदी पार करनेके लिये मेरी नावपर आये। मैं उन्हें पार ले जा रही थी, तबतक वे मुनिश्रेष्ठ काम-पीड़ित हो मेरे पास आ मुझे समझाते हुए मधुर वाणीमें बोले और उन्होंने मुझसे अपने जन्म और कुलका परिचय दिया। इसपर मैंने कहा--'भगवन्! मैं तो निषादकी पुत्री हूँ"
sāntvapūrvaṁ muniśreṣṭhaḥ kāmārto madhuraṁ vacaḥ | ukta-janma-kulaṁ mahām asmi dāśasūtety aham ||
ဝိုင်ရှမ္ပာယနက ပြောသည်– ထိုအခါ ကာမဆန္ဒကြောင့် စိတ်လှုပ်ရှားနေသော မုနိအမြတ်တော်သည် နူးညံ့ချိုမြိန်သော စကားဖြင့် ငါ့အား ပြောဆိုလာပြီး၊ အရင်ဆုံး မိမိ၏ မွေးဖွားရာနှင့် မျိုးရိုးကို ကြေညာ하였다။ ထိုအပေါ် ငါက «အရှင်ဘုရား၊ ကျွန်မသည် နိရှာဒ (ငါးဖမ်းသူ) မိန်းမ၏ သမီးပင် ဖြစ်ပါသည်» ဟု ပြန်လည်ဆို하였다။
वैशम्पायन उवाच