Kubera’s Arrival and the Disclosure of Agastya’s Curse
Vaiśaṃpāyana–Janamejaya Narrative
येषां चान्नानि भुज्जीत यत्र च स्यात् प्रतिश्रय: । स त्वं प्रतिश्रयेडस्माकं पूज्यमान: सुखोषित:,“जिनका अन्न खाये और जहाँ अपनेको आश्रय मिला हो, उनके साथ भी द्रोह या विश्वासघात करना उचित नहीं है। तू हमारे आश्रयमें हमलोगोंसे सम्मानित होकर सुखपूर्वक रहा है
वैशम्पायन उवाच