Saṃsāra-Gahana Allegory: The Brāhmaṇa in the Forest and Well (संसारगहन-आख्यान)
वृक्षप्रपाताच्च भयं मूषिकेभ्यश्व॒ पज्चमम् | मधुलोभान्मधुकरै: षष्ठमाहुर्महद् भयम्,जिस वृक्षके सहारे वह लटका हुआ है, उसे काले और सफेद चूहे निरन्तर काट रहे हैं। पहले तो उसे वनके दुर्गम प्रदेशके भीतर ही अनेक सर्पोंसे भय है, दूसरा भय सीमापर खड़ी हुई उस भयंकर स्त्रीसे है, तीसरा कुँएके नीचे बैठे हुए नागसे है, चौथा कुँएके मुखबन्धके पास खड़े हुए हाथीसे है और पाँचवाँ भय चूहोंके काट देनेपर उस वृक्षसे गिर जानेका है। इनके सिवा, मधुके लोभसे मधुमक्खियोंकी ओरसे जो उसको महान् भय प्राप्त होनेवाला है, वह छठा भय बताया गया है
vṛkṣaprapātāc ca bhayaṃ mūṣikebhyaś ca pañcamam | madhulobhān madhukaraiḥ ṣaṣṭham āhur mahad bhayam ||
Ketakutan kelima ialah takut terjatuh dari pokok, kerana tikus-tikus itu mengeratnya tanpa henti. Dan kerana tamak akan madu, dikatakan ada ketakutan keenam yang besar: bahaya daripada lebah.
विदुर उवाच