Adhyātma–Adhibhūta–Adhidaivata Correspondences and the Triguṇa Lakṣaṇas (Śānti-parva 301)
षड्गुणं च मनो ज्ञात्वा नभ: पञ्चगुणं तथा । बुद्धि चतुर्गुणां ज्ञात्वा तमश्न त्रिगुणं तथा,वक्ताओंमें श्रेष्ठ नरेश्वर! जो ज्ञानके द्वारा मनुष्य, पिशाच, राक्षस, यक्ष, सर्प, गन्धर्व, पितर, तिर्यग्योनि, गरुड़, मरुदण, रार्जर्षि, ब्रह्मर्षि, असुर, विश्वेदेव, देवर्षि, योगी, प्रजापति तथा ब्रह्माजीके भी सम्पूर्ण दुर्जय विषयोंकों सदोष जानकर, संसारके मनुष्योंका परमायुकाल तथा सुखके परमतत्त्वका ठीक-ठीक ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं और विषयोंकी इच्छा रखनेवाले पुरुषोंको समय-समयपर जो दु:ख प्राप्त होता है, उसको, तिर्यग्योनि और नरकमें पड़नेवाले जीवोंके दुःखको, स्वर्ग तथा वेदकी फल-श्रुतियोंके सम्पूर्ण गुण-दोषोंको जानकर ज्ञानयोग, सांख्यज्ञान और योगमार्गके गुण-दोषोंको भी समझ लेते हैं तथा भरतनन्दन! सत्त्वगुणके दस, रजोगुणके नौउ, तमोगुणके आठ, बुद्धिके सातरं, मनके छ:5 और आकाशके पाँचः गुणोंका ज्ञान प्राप्त करके बुद्धिके दूसरे चार, तमोगुणके दूसरे तीन, रजोगुणके दूसरे दो* और सत्त्वगुणके पुनः: एक* गुणको जानकर आत्माकी प्राप्ति करानेवाले मार्ग--प्राकृत प्रलय तथा आत्मविचारको ठीक-ठीक जान लेते हैं, वे ज्ञान- विज्ञानसे सम्पन्न तथा मोक्षोपयोगी साधनोंके अनुष्ठानसे शुद्धचित्त हुए कल्याणमय सांख्ययोगी परम आकाशको प्राप्त होनेवाले सूक्ष्म भूतोंक समान मंगलमय मोक्षको प्राप्त कर लेते हैं
ṣaḍguṇaṃ ca mano jñātvā nabhaḥ pañcaguṇaṃ tathā | buddhiṃ caturguṇāṃ jñātvā tamaś ca triguṇaṃ tathā ||
Bhīṣma berkata: “Setelah memahami bahawa minda (manas) dicirikan oleh enam sifat, ruang (ākāśa) oleh lima, intelek (buddhi) oleh empat, dan kegelapan/kejahilan (tamas) oleh tiga—sesiapa yang mengetahui susunan bertingkat sifat-sifat ini memperoleh wawasan yang membezakan tentang unsur-unsur pengalaman. Pembezaan ini menyokong pelepasan daripada objek-objek indera dan meneguhkan pencari pada jalan yang membawa melampaui kekeliruan menuju pembebasan.”
भीष्म उवाच