(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५६ श्लोक हैं।) ऑपन-आ प्रात बछ। अर: 2 एकोननवर्त्याधेकशततमो< ध्याय: धृष्टद्युम्नका दुःशासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण संजय उवाच तस्मिंस्तथा वर्तमाने गजाश्वनरसंक्षये । दुःशासनो महाराज धृष्टद्युम्ममयोधयत्,संजय कहते हैं--महाराज! इस प्रकार हाथी, घोड़ों और मनुष्योंका संहार करनेवाले उस वर्तमान युद्धमें दुःशासन धृष्टद्युम्नके साथ जूझने लगा
sañjaya uvāca | tasmiṁs tathā vartamāne gajāśvanarasaṁkṣaye | duḥśāsano mahārāja dhṛṣṭadyumnam ayodhayat |
Sañjaya berkata: “Wahai Raja, ketika pertempuran itu sedang berlangsung—membawa pembantaian ke atas gajah, kuda dan manusia—Duḥśāsana pun bertempur dengan Dhrishtadyumna.”
संजय उवाच