अजिशीर्षे प्रातःसंध्यायां संग्रामवर्णनम् / Dawn-Transition Battle at Ajiśīrṣa
Chapter 161
ऑपनआक्रा बछ। लि, एकोनषष्ट्यधिकशततमो< ध्याय: अभश्रत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाज्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध संजय उवाच तथा परुषितं दृष्टवा सूतपुत्रेण मातुलम् | खड्गमुद्यम्य वेगेन द्रौणिरभ्यपतद् द्रुतम्,संजय कहते हैं--राजन्! इस प्रकार अपने मामाके प्रति सूतपुत्र कर्णको कटु वचन सुनाते देख अश्वत्थामा बड़े वेगसे तलवार उठाकर तुरंत कर्णपर टूट पड़ा
sañjaya uvāca | tathā paruṣitaṃ dṛṣṭvā sūtaputreṇa mātulam | khaḍgam udyamya vegena drauṇir abhyapatad drutam ||
Sañjaya berkata: “Wahai Raja, melihat Karṇa—anak sais kereta—menyapa bapa saudara sebelah ibunya dengan kata-kata yang pedih demikian, Aśvatthāmā, putera Droṇa, segera menghunus dan mengangkat pedangnya; didorong amarah yang tiba-tiba, dia meluru pantas untuk menyerang Karṇa.”
संजय उवाच