Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
एवं प्रवर्तितं चक्र नानुवर्तयतीह य: । अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति,हे पार्थ! जो पुरुष इस लोकमें इस प्रकार परम्परासे प्रचलित सृष्टिचक्रके* अनुकूल नहीं बरतता अर्थात् अपने कर्तव्यका पालन नहीं करता, वह इन्द्रियोंके द्वारा भोगोंमें रमण करनेवाला पापायु पुरुष व्यर्थ ही जीता है सम्बन्ध-- अजुनिकी प्रार्थनके अनुसार भगवान्ने उसे एक निश्चित कल्याणकारक साधन बतलानेके उद्देश्यसे चौथे श*लोकसे लेकर यहॉतक यह बात सिद्ध की कि मनुष्य किसी भी स्थितिमें क्यों न हो, उसे अपने वर्ण. आश्रम, स्वभाव और परिस्थितिके अनुरूप विहित कर्म करते ही रहना चाहिये। इस बातको सिद्ध करनेके लिये पूर्वश्लोकोंगें भगवान्ने क्रमशः निम्नलिखित बातें कही हैं-- १-कर्म किये बिना नैष्कर्म्यसिद्धिरूप कर्मनिष्ठा नहीं मिलती (गीता 3/४॥। २-करमोंका त्याग कर देनेमात्रये ज्ञाननिष्ठा सिद्ध नहीं होती (गीता ३/४)। ३-एक क्षणके लिये भी मनुष्य सर्वथा कर्म किये बिना नहीं रह सकता (गीता ३/५)। ४-बाहरसे कर्मोका त्याग करके मनसे विषयोंका चिन्तन करते रहना मिशथ्याचार है (गीता ३।॥६)। ५-मन-इन्द्रियोंको वश्में करके निष्कामभथावसे कर्म करनेवाला श्रेष्ठ है (गीता ३/७)। दइ-कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है (गीता ३/८)। ७-बिना कर्म किये शरीरनिवरहि भी नहीं हो यकता (गीता ३/८॥। ८-यज्ञके लिये किये जानेवाले कर्म बन्धन करनेवाले नहीं; बल्कि मुक्तिके कारण हैं (गीता ३॥९)। ९-कर्म करनेके लिये प्रजापतिकी आज्ञा है और निःस्वार्थभावये उसका पालन करनेसे श्रेयकी प्राप्ति होती है (गीता ३/१०-११॥। १०-कर्तव्यका पालन किये बिना भोगोंका उपभोग करनेवाला चोर है (गीता ३/१२)। ११-कर्तव्यका पालन करके यज्ञशेषसे शरीरनिवहिके लिये भोजनादि करनेवाला सब पापोंसे छूट जाता है (गीता ३/१३)। १२-जो यज्ञादि न करके केवल शरीरपालनके लिये भोजन पकाता है. वह पापी है (गीता ३/१३)। १३-कर्तव्यकर्मके त्यागद्वारा सृष्टिचक्रमें बाधा पहुँचानेवाले मनुष्यका जीवन व्यर्थ और पापमय है (गीता 3
evaṁ pravartitaṁ cakraṁ nānuvartayatīha yaḥ | aghāyur indriyārāmo moghaṁ pārtha sa jīvati ||
Wahai Pārtha, sesiapa di dunia ini tidak mengikut roda tertib kosmik yang telah digerakkan demikian—tidak hidup selaras dengan irama kewajipan dan yajña—maka sia-sialah hidupnya. Hanya bersenang dalam kenikmatan indera, dia menjalani hidup yang berdosa dan terbuang, terputus daripada timbal balik yang menegakkan dunia.
अजुन उवाच