राज्ञ: समीपे पुरुषोत्तमौ तु यमाविमौ विष्णुमहेन्द्र कल्पौ । मनुष्यलोके सकले समो<स्ति ययोर्न रूपे न बले न शीले,महाराज युधिष्ठछिरके समीप बैठे हुए वे इन्द्र और उपेन्द्रके समान दोनों नरश्रेष्ठ माद्रीके जुड़वें पुत्र नकुल-सहदेव हैं। सम्पूर्ण मानव-जगत्में इनके रूप, बल और शीलकी समानता करनेवाला दूसरा कोई नहीं है
rājñaḥ samīpe puruṣottamau tu yamāv imau viṣṇu-mahendra-kalpau | manuṣya-loke sakale samo 'sti yayor na rūpe na bale na śīle ||
उत्तरा म्हणाली—राजाच्या समीप बसलेले हे दोघे पुरुषोत्तम, माद्रीचे जुळे पुत्र, विष्णू आणि महेंद्र (इंद्र) यांसारखे आहेत। संपूर्ण मनुष्यलोकात रूप, बल आणि शील यांत यांच्यासमान दुसरा कोणी नाही।
उत्तर उवाच