Arjuna’s Concentrated Archery and the Rout of the Kaurava Mahārathas
Gāṇḍīva-Nirghoṣa Episode
तत:ः कनकपवग्रिर्वीर: संनतपर्वभि: । त्वरन् गाण्डीवनिर्मुक्तैरर्जुनस्तस्य वाजिन:,तब वीर अर्जुनने गाण्डीव धनुषसे छूटे हुए झुकी हुई गाँठ और सुनहरे पर्वाग्र (फल)- वाले चार बाणोंद्वारा बड़ी उतावलीसे कृपाचार्यके चारों घोड़ोंको बींध डाला। वे चारों बाण बड़े तीखे और उत्तम थे। विषाग्निसे जलते हुए सर्पोकी भाँति उन तेज बाणोंकी मार खाकर वे सभी घोड़े सहसा उछल पड़े। इससे कृपाचार्य अपने स्थानसे गिर गये
tataḥ kanakapavagrir vīraḥ sannatapārva-bhiḥ | tvaran gāṇḍīva-nirmuktair arjunas tasya vājinaḥ ||
मग वीर सव्यसाची अर्जुनाने गाण्डीवातून त्वरेने सुगठित, किंचित वाकड्या सांध्यांचे व सुवर्णाग्र असलेले चार उत्तम तीक्ष्ण बाण सोडून कृपाचार्यांचे चारही घोडे भेदले. विषाग्नीने दग्ध सर्पांसारखे ते घोडे सहसा उडाले आणि कृप आपल्या स्थानावरून खाली पडले।
वैशम्पायन उवाच