Virāṭa-parva Adhyāya 54 — Missile-Exchange and Tactical Redirection
Arjuna, Aśvatthāman, Karṇa
तेषामनीकानि बहूनि गाढं व्यूढानि दृष्टवा बहुलध्वजानि । मत्स्यस्य पुत्र द्विषतां निहन्ता वैराटिमामन्त्रय ततो5भ्युवाच,उनकी अनेक सेनाएँ थीं और उन सबकी अच्छी तरह व्यूह-रचना की गयी थी। उन सेनाओंमें बहुत-सी ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं। शत्रुओंका नाश करनेवाले अर्जुनने उन सबको देखकर विराट॒पुत्र उत्तरको सम्बोधित करके कहा--
teṣām anīkāni bahūni gāḍhaṃ vyūḍhāni dṛṣṭvā bahula-dhvajāni | matsyasya putra-dviṣatāṃ nihantā vairāṭim āmantrya tato 'bhyuvāca ||
त्यांची अनेक सैन्यदले दाटीवाटीने व्यूहबद्ध होती आणि असंख्य ध्वजा-पताका फडकत होत्या। शत्रुनाशक अर्जुन हे पाहून मत्स्यराजाचा पुत्र वैराटी उत्तर याला संबोधून पुढे म्हणाला—
वैशम्पायन उवाच