दमयन्तीस्वयंवरः — देववेषधारणं, सत्यप्रार्थना, नलवरणम्
Damayantī’s Svayaṃvara: Divine Disguises, Truth-Vow, and Choosing Nala
शस्त्रेण निधन काले ये गच्छन्त्यपराड्मुखा: । अयं लोको$क्षयस्तेषां यथैव मम कामधुक्,बृहदश्व कहते हैं--राजन्! नारदकी बात सुनकर बल और वृत्रासुरका वध करनेवाले इन्द्रने उनसे पूछा--“मुने! जो धर्मज्ञ भूपाल अपने प्राणोंका मोह छोड़कर युद्ध करते हैं और पीठ न दिखाकर लड़ते समय किसी श'स्त्रके आघातसे मृत्युको प्राप्त होते हैं, उनके लिये हमारा यह स्वर्गलोक अक्षय हो जाता है और मेरी ही तरह उन्हें भी यह मनोवांछित भोग प्रदान करता है
śastreṇa nidhana-kāle ye gacchanty aparāṅmukhāḥ | ayaṁ loko 'kṣayas teṣāṁ yathaiva mama kāmadhuk ||
“जे नियत काळी शस्त्राघाताने, पाठ न दाखविता, मृत्यू पावतात—त्यांच्यासाठी हा लोक अक्षय होतो; आणि माझ्या कामधेनूप्रमाणे त्यांना इच्छित भोग देतो.”
बृहदश्च उवाच