जातमात्र च त॑ गर्भ धात्र्या सम्मन्त्रय भाविनी । मज्जूषायां समाधाय स्वास्तीर्णायां समन्ततः,उस बालकके पैदा होते ही भामिनी कुन्तीने धायसे सलाह लेकर एक पिटारी मँगवायी और उसमें सब ओर सुन्दर मुलायम बिछौने बिछा दिये। इसके बाद उस पिटारीमें चारों ओर मोम चुपड़ दिया, जिससे उसके भीतर जल न प्रवेश कर सके। जब वह सब तरहसे चिकनी और सुखद हो गयी, तब उसके भीतर उस बालकको सुला दिया और उसका सुन्दर ढककन बंद कर दिया तथा रोते-रोते उस पिटारीको अश्वनदीमें छोड़ दिया
jātamātraṃ ca taṃ garbhaṃ dhātryā sammantrya bhāvinī | mañjūṣāyāṃ samādhāya svāstīrṇāyāṃ samantataḥ ||
बालक जन्मताच भामिनी कुंतीने धायशी सल्ला करून एक पेटी मागवली आणि तिच्यात सर्व बाजूंनी सुंदर, मऊ अंथरूण अंथरले.
वैशग्पायन उवाच