Draupadī’s Lament and Theodicy: Dharma, Dice, and Īśvara’s Governance (Āraṇyaka-parva 31)
अतिवादाद् वदाम्येष मा धर्ममभिशड्किथा: । धर्माभिशड्की पुरुषस्तिर्यग्गतिपरायण:,मैं सारे प्रमाणोंसे ऊपर उठकर केवल शास्त्रके आधारपर यह जोर देकर कह रहा हूँ कि तुम धर्मके विषयमें शंका न करो; क्योंकि धर्मपर संदेह करनेवाला मानव पशु-पक्षियोंकी योनिमें जन्म लेता है
मी ठामपणे सांगतो—धर्माविषयी शंका करू नका; कारण जो पुरुष धर्मावर संशय घेतो, तो तिर्यग्गतीला—पशु-पक्ष्यांच्या योनीला—प्राप्त होतो.
युधिछिर उवाच