कुन्तीगर्भगोपनम् तथा मञ्जूषाप्रवाहः
Kuntī’s concealed childbirth and the river-borne casket
स तेन राक्षसश्रेष्ठ: सरथ: साश्चसारथि: । प्रजज्वाल महाज्वालेनाग्निनाभिपरिप्लुत:,युधिष्ठिर! श्रीरामद्वारा धनुषको दूरतक खींचकर छोड़े हुए उस बाणके लगते ही राक्षसराज रावण रथ, घोड़े और सारथिसहित इस प्रकार जलने लगा मानों भयंकर लपटोंवाली आगके लपेटमें आ गया हो
तो श्रेष्ठ राक्षस रथासह, घोडे व सारथीसह, महाज्वाळांनी युक्त अग्नीने सर्व बाजूंनी वेढला जाऊन धगधगून पेटला।
मार्कण्डेय उवाच