Sāvitrī’s Report and Nārada’s Prognosis (सावित्र्याख्यान—सत्यवान्-गुणवर्णनं तथा अल्पायुषः पूर्वसूचना)
|) |] ततस्तथोक्त पितरं रामो विज्ञाय वीर्यवान् वन प्रतस्थे धर्मात्मा राजा सत्यो भवत्विति,श्रीरामचन्द्रजी शक्तिशाली होनेके साथ ही बड़े धर्मात्मा थे। उन्होंने पिताके पूर्वोक्त वरदानकी बात जानकर राजाके सत्यकी रक्षा हो, इस उद्देश्यसे स्वयं ही वनको प्रस्थान किया
त्यानंतर वीर्यवान, धर्मात्मा रामाने पित्याचे ते वचन जाणून—राजा सत्यनिष्ठ राहावा, या हेतूने—स्वतः वनाकडे प्रस्थान केले.
मार्कण्डेय उवाच