Brahmāstra-prayogaḥ: Daśagrīvasya Māyā-vadhaḥ
Rāma–Rāvaṇa Encounter under Illusion
तेषां मध्ये महर्षीणां शृण्वतामनुशोचताम् । मार्कण्डेयमिदं वाक्यमब्रवीत् पाण्डुनन्दन:,महर्षिलोग भी पाण्डवोंपर आये हुए संकटको सुनते और उसके लिये बारंबार शोक प्रकट करते थे। उन्हींमेंसे मार्कण्डेयजीको लक्ष्य करके पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने इस प्रकार कहा
त्या महर्षींच्या मध्ये—जे पांडवांवर आलेले संकट ऐकून वारंवार शोक करीत होते—पांडुनंदन (युधिष्ठिर) यांनी मार्कंडेय मुनींना उद्देशून हे वचन सांगितले.
वैशम्पायन उवाच