Duryodhana’s Śaraṇāgati and the Pāṇḍavas’ Resolve
Gandharva Encounter
एवं सेन्द्रं जगत् सर्व श्वेतपर्वतसंस्थितम् । प्रहृष्ट प्रेक्षते स्कन्द॑ न च ग्लायति दर्शनात्,इस प्रकार इन्द्रसहित सम्पूर्ण जगत् बड़ी प्रसन्नताके साथ श्वेत पर्वतपर विराजमान कुमार कार्तिकेयका दर्शन करने लगा। उनके दर्शनसे किसीका जी नहीं भरता था
अशा रीतीने इंद्रासह सर्व जगत श्वेत पर्वतावर स्थित होऊन आनंदाने स्कंदाचे दर्शन करू लागले; त्यांच्या दर्शनाने कोणाचेही मन तृप्त होत नव्हते.
मार्कण्डेय उवाच