Vyādha–Brāhmaṇa Saṃvāda: Śāpa, Vṛtta-Dharma, and Counsel Against Viṣāda
Grief
मातृस्तु गौरवादन्ये पितृनन्ये तु मेनिरे । दुष्करं कुरुते माता विवर्धयति या प्रजा:,कुछ लोग माताओंको गौरवकी दृष्टिसे बड़ी मानते हैं। दूसरे लोग पिताको महत्त्व देते हैं। परंतु माता जो अपनी संतानोंको पाल-पोसकर बड़ा बनाती है, वह उसका कठिन कार्य है
mātṛs tu gauravād anye pitṝn anye tu menire | duṣkaraṃ kurute mātā vivardhayati yā prajāḥ ||
काही जण मातेला अधिक पूज्य मानतात, तर काही पित्याला अधिक महत्त्व देतात; पण जी माता संततीला वाढवून मोठे करते, तीच खरे तर दुष्कर कार्य करते.
मार्कण्डेय उवाच