Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
अपूर्वमिव पश्याम उदकं नात्र नीयत इत्यथामात्यो5नुदकं वनं कारयित्वोदारवृक्ष॑ं बहुपुष्य-फलमूलं तस्य मध्ये मुक्ताजालमयीं पार्श्व वापी गूढां सुधासलिललिप्तां स रहस्युपगम्य राजान-मब्रवीत्,“हमें यहाँ एक अद्भुत-सी बात दिखायी देती है। महाराजके अन्तःपुरमें पानी नहीं जाने पाता है। (हमलोग इसीकी चौकसी करती हैं।)” उनकी यह बात सुनकर प्रधान मन्त्रीने एक बाग लगवाया, जिसमें प्रत्यक्षरूपसे कोई जलाशय नहीं था। उसमें बड़े सुन्दर और ऊँचे- ऊँचे वृक्ष लगवाये गये थे। वहाँ फल-फूल और कन्द-मूलकी भी बहुतायत थी। उस उपवनके मध्यभागमें एक किनारेकी ओर सुधाके समान स्वच्छ जलसे भरी हुई एक बावली भी बनवायी थी, जो मोतियोंके जालसे निर्मित थी। उस बावलीको (लताओंद्वारा) बाहरसे ढक दिया गया था। उस उद्यानके तैयार हो जानेपर मन्त्रीने किसी दिन राजासे मिलकर कहा--
vaiśampāyana uvāca | apūrvam iva paśyāma udakaṃ nātra nīyate ity athāmātyo 'nudakaṃ vanaṃ kārayitvodāravṛkṣaṃ bahupuṣya-phala-mūlaṃ tasya madhye muktājālamayīṃ pārśva-vāpīṃ gūḍhāṃ sudhāsalila-liptāṃ sa rahasy upagamya rājānam abravīt |
वैशंपायन म्हणाले— “आम्हाला एक अपूर्व गोष्ट दिसते—महाराजांच्या अंतःपुरात पाणी नेता येत नाही.” हे ऐकून प्रधान मंत्र्याने असा उपवन तयार करविला की बाहेरून कोणताही जलस्रोत दिसू नये. त्यात उंच, देखणे वृक्ष लावले; फुले-फळे आणि कंदमुळे यांची समृद्धी केली. त्या बागेच्या मध्यभागी एका बाजूस, सुधेसारख्या निर्मळ पाण्याने भरलेली, जणू मोत्यांच्या जाळ्याने अलंकृत अशी एक गुप्त बावडी बांधली व ती दृष्टीआड ठेवली. उद्यान सिद्ध झाल्यावर मंत्री एके दिवशी गुप्तपणे राजाकडे जाऊन म्हणाला—
वैशम्पायन उवाच
Effective governance often requires discretion and practical ingenuity: the minister responds to a sensitive palace constraint by creating a concealed yet functional solution, protecting royal privacy and security while meeting essential needs.
A report arises that water cannot be brought into the king’s inner quarters. The chief minister then builds a garden that seems waterless but secretly contains a pearl-adorned stepwell of clear water, and he privately informs the king once the arrangement is complete.